ISRO Main Scientist Kaise Bane (इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने)

इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने (ISRO Me Scientist Kaise Bane), Hello दोस्तों Welcome to fullygyan.com आज के इस article में हम बात करने वाले हैं कि ISRO (Indian Space Research Organisation) में Scientist Kaise Bane (इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने) | ISRO Me Scientist Kaise Bane की पूरी जानकारी हमलोग विस्तारपूर्वक एवं सरलता से बात करने वाले है, इसलिए कृपया इस लेख (article) को अंत तक पढ़े।

ISRO Official Website || ISRO Main Scientist Kaise Bane (इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने)
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आज के समय में जब भी धरती पर किसी भी तरह की आपदाएं आती है, जैसे- बाढ़, सुनामी, भूकंप, चक्रवात, तेज बारिश, इत्यादि, तो अभी के समय इसकी जानकारी वैज्ञानिकों को पहले से ही मिल जाती है, जिससे लाखों लोगों की जान बचाना मुमकिन हो जाता है।

पहले के समय में ऐसा नहीं था, पहले के समय में जब भी प्राकृतिक आपदाएं आती थी, तो लाखों लोगों की जाने चली जाती थी और सरकार को भी भारी नुकसान चुकाना पढ़ता था। 

आज के समय में हमारे देश के वैज्ञानिकों के कारण अब मौसम संबंधी पूर्वानुमान के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं के बारे में जानकारी हमलोगों तक पहुंच पा रही है। 

लेकिन क्या आप जानते हैं? वैज्ञानिकों तक इसकी जानकारी कैसे पहुंचती है। हर देश का एक Research Organisation होता है, जहां पर कई सारे वैज्ञानिक काम करते हैं। अंतरिक्ष पर मौजूद सेटेलाइट की मदद से धरती पर हो रही गतिविधियों की जानकारी पता करते हैं और जानकारी हमलोगों तक पहुचती हैं। 

हमारे देश भारत के Research Organisation का नाम ISRO है, ISRO में हजारों कर्मचारी मिलकर देश के लिए काम करते हैं। आज के समय में विज्ञान से जुड़ी या फिर अंतरिक्ष से जुड़ी कोई भी बात हो, तो इसरो का नाम सबसे पहले आता है।

इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने (ISRO main Scientist Kaise Bane)

यदि आप भी इसरो में काम करना चाहते हैं तो आज के इस ब्लॉग में बताएँगे कि इसरो में जॉब के लिए आवेदन कैसे करना है? इसलिए ब्लॉग को पूरा पढ़े और धयान से समझें।

ISRO क्या है? ISRO Me Scientist Kaise Bane

ISRO का पूरा नाम “Indian space Research Organisation” है। ISRO को हिंदी में “भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन” कहा जाता है।

इसे भारत सरकार के Space Department के द्वारा manage किया जाता है, और space center में होने होने वाले प्रत्येक कार्य की रिपोर्ट सीधे भारत के प्रधानमंत्री को पहुंचाई जाती है। 

इसरो भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 में की गई थी और इसकी स्थापना मशहूर वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई के प्रयासों के द्वारा हुई थी इसीलिए डॉक्टर विक्रम साराभाई को भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों का संस्थापक/ जनक माना जाता है। 

इस संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिए अंतरिक्ष संबंधी तकनीक उपलब्ध करवाना है। 

इसरो दुनिया की top 5 सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक है और अब तक इसरो ने अंतरिक्ष में 370 सैटेलाइट भेज चुका है। जिसमें से 101 भारत के लिए और 269 विदेशों के लिए सैटेलाइट भेजे जा चुके हैं।

हाल ही में चंद्रयान-2 की सफलता के बाद अब भारत द्वारा अंतरिक्ष में 371 सैटेलाइट भेजे जा चुके हैं। 

भारत का पहला सेटेलाइट 19 अप्रैल 1975 को लांच किया गया था। जिसका नाम गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। इसके बाद रोहिणी एक भारतीय निर्मित लॉन्च व्हीकल SLV-3 द्वारा ऑर्बिट में रखा जाने वाला पहला सेटेलाइट 18 जुलाई 1980 में लांच किया गया इसी तरह ISRO ने ऐसी कई सारी उपलब्धियों को हासिल की है, जिस वजह से इसरो दुनिया की सबसे बेहतरीन स्पेस एजेंसी में से एक माना जाता है। 

ISRO ने दूरसंचार, टेलीविजन प्रसारण, मौसम विज्ञान, और आपदा चेतावनी के लिए भारत के राष्ट्रीय उपग्रह यानि इंडियन नेशनल सैटेलाइट इंसर्ट प्रणाली और धरती के संसाधन निगरानी और प्रबंधन के लिए भारतीय रिमोट सेंसिंग यानी इंडियन रिमोट सेंसिंग IRS सैटलाइट सहित कई अन्य अंतरिक्ष प्रणालियों का शुभारंभ किया है। 

ISRO इस साल 2021 में अंतरिक्ष यात्रियों को ऑर्बिट में लाने की योजना बना रहा है। ISRO का सबसे महत्वपूर्ण मिशन यह है कि वे अंतरिक्ष विज्ञान के सहायता से कुछ ऐसे ग्रहों की खोज करना चाहते हैं जो कि हमारे पृथ्वी का विकास और जीवन को एक नया रूप प्रदान कर सकें। 

इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि के भारत अंतरिक्ष कार्यक्रम कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में इसरो के लिए काम करना हमारे लिए कितने गर्व की बात हो सकती है तो चलिए अब जानते हैं इसरो में नौकरी के लिए आवेदन कैसे करें।

ISRO में नौकरी के लिए आवेदन कैसे करें

दोस्तों आपको बता दें कि ISRO दुनिया के सबसे सफल अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक है। साथ ही यह विज्ञान विषय से जुड़े युवाओं के लिए नौकरी के नए-नए अवसर भी प्रदान करता है।

ISRO समय समय पर आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों की भर्ती करता है। यदि आप भी अंतरिक्ष के रहस्यों के साथ भविष्य के निर्माण में रुचि रखते हैं या भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको ISRO में अपना सपना पूरा करने का अवसर जरूर मिलेगा। 

जानकारी के लिए आपको बता दें कि इसरो मैं दसवीं, 12वीं, ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, इंजीनियर, साइंटिस्ट, आदि सभी कैंडिडेट नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

इसरो कैंडीडेट्स को स्पेस साइंटिस्ट और इंजीनियर्स के लिए ही नियुक्त करता है। यंग ग्रेजुएट को तो आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल, कंप्यूटर विज्ञान आदि जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक इंजीनियर के रूप में भर्ती किया जाता है। 

इसरो युवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण अवसर उपलब्ध कराता रहता है, जहां युवाओं को इनोवेटिव टेक्नालॉजिस का विकास करने तथा अंतरिक्ष की खोज के लिए आवश्यक उन्नत तकनीक की स्थापना करने में शामिल होने का अवसर प्रदान कराता है।

अगर आप इसरो में नौकरी करना चाहते हैं, तो आपको इसरो की ऑफिशियल वेबसाइट www.isro.gov.in पर जाकर अप्लाई करना होगा। 

ISRO Official Website || ISRO Main Scientist Kaise Bane (इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने)
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इसके लिए आपको ऑफिशियल वेबसाइट में जाने के बाद इसके होम पेज पर कैरियर स्टेप के ऊपर क्लिक करना है। आपकी Qualification के आधार पर अपने मनचाहे पद पर आवेदन करना है और सारी डिटेल भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करना है। 

उसके बाद आपके द्वारा भेजी गई डिटेल्स से कैंडिडेट्स को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा और उन्हें रिटेन एग्जाम के लिए बुलाया जाएगा। 

रिटन एग्जाम में सफल हुए कैंडिडेट्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है और इस तरह ISRO अपने अपने यहां काम करने के लिए कैंडिडेट्स की नियुक्त करता है।

इसरो साइंटिस्ट कैसे बने? (ISRO Scientist Kaise Bane)

ISRO में काम करने का देश की हर इंजीनियर, साइंटिस्ट और टेक्नीशियन का सपना होता है। उनके पास इस सपने को पूरा करने के लिए इसरो हर साल साइंटिस्ट, इंजीनियर, रिसर्चर समेत कई सारे पदों पर भर्तियां निकलता है, लेकिन इन पदों के बारे में काफी कम लोगों को ही पता चल पाता है। आज हम इसरो में निकलने वाले साइंटिस्ट की नौकरी के बारे में बता रहे हैं। साथ ही इस नौकरी के लिए क्या-क्या योग्यताएं होनी चाहिए इसके बारे में भी आपको बता रहे हैं।

ISRO Main Scientist Kaise Bane (इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने)
ISRO Main Scientist Kaise Bane (इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने)

इसरो साइंटिस्ट बनने के लिए उम्र सीमा क्या होनी चाहिए? (ISRO Scientist Age Limit)

ISRO में साइंटिस्ट पद पर भर्ती होने के लिए उम्र सीमा जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 35 साल होती है। वहीं, नियम के अनुसार SC/ ST उम्मीदवारों को पांच साल की छूट दी जाती है।

इसरो साइंटिस्ट चयन प्रक्रिया (ISRO Scientist Selection Process)

ISRO साइंटिस्ट चयन प्रक्रिया में सबसे पहले स्क्रीनिंग टेस्ट और बायोडाटा के हिसाब से उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है, शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाता है, लिखित परीक्षा में सफल हुए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इसके आधार पर अंतिम चयन होता है।

इसरो में साइंटिस्ट कैसे बने इसकी योग्यता क्या है? (ISRO Me Scientist Kaise Bane Eski Yogyata Kya Hai)

ISRO साइंटिस्ट पद पर नौकरी के लिए BE, B tech, BSC, BSC Engg की डिग्री होनी चाहिए, जिन उम्मीदवारों ने सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल में कोर्स किया है, वे इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को कम से कम 65 फ़ीसदी अंक के साथ पास होना चाहिए।

ISRO में साइंटिस्ट बनने के लिए आपकी उम्र 18+ होनी चाहिए अधिकतम 35 की उम्र तक आप अप्लाई कर सकते है।

अगर आप इसरो में साइंटिस्ट बनना चाहते हैं तो आपका सबसे ज्यादा रुचि साइंस और मैथ्स में होना चाहिए तभी आप इस फील्ड में कुछ खास कर सकते हैं या फिर यह कह सकते हैं कि कुछ नया एक्सपेरिमेंट और इनोवेशन कर सकते हैं।

इस फील्ड में आप को आगे बढ़ने के लिए साइंस थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ज्ञान भी अति आवश्यक है। जितना आप प्रैक्टिकल एक्सपेरिमेंट करेंगे उतना ही आप चीजों के बारे में अच्छे से समझ पाएंगे और उन में होने वाली प्रतिक्रिया को बारीकी से समझ सकेंगे।

इसरो में साइंटिस्ट बनने के लिए आपको अपने देश की मातृभाषा के अलावा अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना अति आवश्यक है, क्योंकि इसरो में बतौर वैज्ञानिक कार्य करते वक्त आपको अंग्रेजी में पूर्णता आचार-व्यवहार करना होगा।

ISRO जॉब क्वालिफिकेशन (ISRO Job Qualifications)

ISRO में साइंटिस्ट और इंजीनियर पद में नौकरी करने के लिए  BE, B tech, BSC, Engg,ITI, DIPLOMA, MSC, एमफिल, PHD आदि में से किसी भी एक में डिग्री होनी चाहिए। 

जिन कैंडिडेट्स ने सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, जैसे फील्ड में कोर्स किया है वे भी आवेदन कर सकते हैं। 

कैंडिडेट के पास कम से कम 65% करियर मार्क्स होने चाहिए। साथ ही इसरो में भर्ती के लिए उम्र सीमा जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 35 साल और एसटी एससी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 5 साल की छूट दी जाती है। 

अगर आप 12वीं करने के बाद इसरो से जुड़ने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए सबसे पहले आपको इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करनी होगी। 

इसके लिए आपके 12वीं की परीक्षा में मैथ्स और फिजिक्स जैसे विषय होनी चाहिए। 

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंतरिक्ष एजेंसी में शामिल होने के लिए आपको इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड आईसीआरबी में परीक्षा देकर सफलता हासिल करनी होगी। 

इसके अलावा आप इसरो में सीधी भर्ती के लिए 12वीं के बाद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस साइंस टेक्नोलॉजी आईआईएसटी तिरुवंतपुरम में प्रवेश ले सकते हैं। 

इस इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने के लिए कैंडिडेट्स को आईआईटी जेईई का का एग्जाम देना जरूरी होता है। और इसमें अच्छी रैंक के आधार पर ही आपको आई आई एस टी में दाखिला मिल सकता है। 

आईआईएसटी में दाखिला कब और कैसे लेना है। इसकी पूरी जानकारी आपको इसके ऑफिशियल वेबसाइट www.iist.ac.in पर मिल जायेगी।

आईएसटी में आपको किसी भी डिग्री के कोर्स में 75% अंक रखना जरूरी होता है, उसके बाद ही ISRO के पास जो भी वैकेंसी होती है उसमें आपको भर्ती दे दी जाती है। 

अगर आपने 12वीं के बाद आईआईएसटी के अलावा किसी अन्य इंस्टीट्यूट से ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है जैसे कि आईआईटी और एनआईटी, तब भी आप इसरो में जॉब पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे कैंडिडेट्स के लिए इसरो आईसीआरबी एग्जाम आयोजित करता है, जिसमें सफलता हासिल करने के बाद इसरो इंटरव्यू लेकर कैंडिडेट्स का चुनाव करता है। 

इस एग्जाम का नोटिफिकेशन इसरो की ऑफिशियल वेबसाइट www.isro.gov.in पर आता है। 

चलिए अब बात करते हैं कि इसरो में नौकरी पाने के बाद सैलरी और अन्य सुविधाएं क्या मिलती है।

ISRO में सैलरी कितनी होती है? (ISRO Jobs Salary)

ISRO में अलग-अलग पदों के हिसाब से सैलरी दी जाती है और इसकी शुरुआती सैलरी होती है 15600 से लेकर 39100 तक प्रत्येक माह। 

अगर इसरो में साइंटिस्ट की सैलरी की बात की जाए तो उन्हें प्रति महीने 50,000 या उससे भी ज्यादा सैलरी मिलती है। 

सैलरी के अतिरिक्त कर्मचारियों को आवास और ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी दी जाती है। साथ ही मेडिकल की सुविधा कर्मचारी और उसके परिवार वालों को भी दी जाती है।

इसरो में साइंटिस्ट बनने के क्या फायदे हैं?

इसरो में साइंटिस्ट बनने के बहुत सारे फायदे हैं। इसरो वैज्ञानिक बनने से बहुत बड़ा फायदा यह है कि यह जॉब ग्रेड A ही जॉब है। यह जॉब हाई प्रोफाइल होने के साथ ही इसमें आपकी तनख्वाह और भत्ते काफी बेहतर होते है।

जब आप इस फील्ड में कुछ शानदार करते हैं तो आपको सम्मान के साथ-साथ बहुत बड़े पुरस्कार जैसे- नोबेल पुरस्कार जैसे अवार्ड से सम्मानित किया जाता है, जो कि बड़े गर्व की बात होती है।

इसरो भारत की एक बेहद ही प्रतिष्ठित संस्था है। पूरे भारत भर में इस संस्था में काम करने वाले लोग और किसी न किसी रूप में इस संस्था के हिस्सा बने लोगों का समाज में विशेष सम्मान होता है।

बेहतर सेवा शर्तों और भत्तों को साथ ही यह जॉब आपके पर्सनल ग्रोथ और अपने जीवन को सफल बनाने और इसी क्षेत्र में रहते हुए पदोन्नति के सभी अवसर प्रदान करता है।

न केवल कार्य बल्कि की जीवन के हर एक मोड़ में जैसे खेल, सामाजिक जीवन, निजी जीवन आदि में आपको एक विशेष मान्यता मिलती हैं।

अब क्योंकि यह एक A ग्रेड की जॉब है। इसीलिए आप भारत सरकार द्वारा प्रदत एक बेहद प्रतिष्ठित राजपत्रित अधिकारी (गैजेटेड ऑफिसर) के रूप में विद्यमान होंगे।

FAQ

Q. अंतरिक्ष वैज्ञानिक कैसे बने?

Ans.- अंतरिक्ष वैज्ञानिक भी आप इसरो आईआरसीबी के द्वारा आयोजित परीक्षा को पास करके बन सकते है। क्षेत्र में वैज्ञानिकों का काम अंतरिक्ष में हो रही गतिविधियों पर नजर रखने और उन पर रिसर्च करने का होता है।

Q. वैज्ञानिक कैसे बने?

Ans.- वैज्ञानिक बनने के लिए आपको दसवीं के बाद बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स जैसे विषयों का चयन करना होता है, फिर उसके बाद ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करनी होती है।

Q. साइंटिस्ट कितने प्रकार के होते है?

Ans.- साइंटिस्ट तीन प्रकार के होते है –

  1. अंतरिक्ष वैज्ञानिक
  2. ग्रह वैज्ञानिक
  3. जीवन वैज्ञानिक

Q. इसरो मे जॉब कैसे पाए?

Ans.- अगर आप इसरो में जॉब पाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको इसरो की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा।

Q. साइंटिस्ट का मतलब क्या होता है?

Ans.- साइंटिस्ट वैसे लोगों को कहते हैं जो किसी भी एक विषय पर खोज या रिसर्च करते हैं एवं नए इनोवेटिव चीजों का अविष्कार करते है।

Q. वैज्ञानिक की सैलरी कितनी होती है?

Ans.- वैज्ञानिक की सैलरी फिक्स नहीं होती है यह कितनी भी हो सकती हैं। मिनिमम 50000 से लेकर यह कितनी भी हो सकती है।

Q. साइंटिस्ट का कोर्स कितने साल का होता है?

Ans.- साइंटिस्ट कोर्स की कोई ड्यूरेशन नही होती है इस क्षेत्र में आप जितना रिसर्च करेंगे उतना ही माहिर होते जायेंगे।

ISRO के बारे में कुछ विशेष जानकारी:-

ISRO (Indian Space Research Organization)(भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) 

में वैज्ञानिक बनने से पहले हम जानेंगे इसरो के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी, की स्थापना 1969 में एक स्वतंत्र भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम विकसित करने के लिए की गई थी। इसका मुख्यालय बैंगलोर (बेंगलुरु) में है। 

इसरो के मुख्य कार्यकारी एक अध्यक्ष होते हैं, जो भारत सरकार के अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी होते हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) केंद्रों के देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है। 

अहमदाबाद में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र में सेंसर और पेलोड विकसित किए गए हैं। उपग्रहों को बैंगलोर में यू आर राव सैटेलाइट सेंटर (पूर्व में इसरो सैटेलाइट सेंटर) में डिजाइन, विकसित, इकट्ठा और परीक्षण किया गया है। 

लॉन्च वाहन तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में विकसित किए गए हैं। प्रक्षेपण चेन्नई के पास श्रीहरिकोटा द्वीप पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में होता है। भूस्थिर उपग्रह स्टेशन रखने के लिए मुख्य नियंत्रण सुविधाएं हासन और भोपाल में स्थित हैं। 

रिमोट-सेंसिंग डेटा के लिए रिसेप्शन और प्रोसेसिंग सुविधाएं हैदराबाद में राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर में हैं। इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन है, जिसका मुख्यालय बैंगलोर में है। इसरो का पहला उपग्रह, आर्यभट्ट, 19 अप्रैल, 1975 को सोवियत संघ द्वारा लॉन्च किया गया था। 

                     रोहिणी, भारत निर्मित लॉन्च वाहन (सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल 3) द्वारा कक्षा में रखा जाने वाला पहला उपग्रह, 18 जुलाई 1980 को लॉन्च किया गया था। इसरो ने दूरसंचार, टेलीविजन प्रसारण, मौसम विज्ञान, और आपदा चेतावनी के लिए भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट) प्रणाली और संसाधन निगरानी और प्रबंधन के लिए भारतीय रिमोट सेंसिंग (आईआरएस) उपग्रहों सहित कई अंतरिक्ष प्रणालियों को लॉन्च किया है। 

                      पहला इन्सैट 1988 में लॉन्च किया गया था, और जीसैट नामक भू-समकालिक उपग्रहों को शामिल करने के लिए कार्यक्रम का विस्तार किया गया। पहला आईआरएस उपग्रह भी 1988 में लॉन्च किया गया था, और कार्यक्रम ने अधिक विशिष्ट उपग्रह विकसित किए, जिसमें रडार इमेजिंग सैटेलाइट -1 (RISAT-1, 2012 में लॉन्च किया गया) और सैटेलाइट के साथ Argos और Altika (SARAL, 2013 में लॉन्च किया गया) शामिल हैं। एक संयुक्त भारतीय-फ्रांसीसी मिशन जो समुद्र की लहरों की ऊंचाई को मापता है।

                       इसरो ने बाद में तीन अन्य रॉकेट विकसित किए: ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) उपग्रहों को ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करने के लिए, भूस्थैतिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहन (जीएसएलवी) उपग्रहों को भूस्थिर कक्षा में रखने के लिए, और जीएसएलवी का एक भारी-लिफ्ट संस्करण जिसे जीएसएलवी मार्क कहा जाता है । 

 उन रॉकेटों ने संचार उपग्रहों और पृथ्वी-अवलोकन उपग्रहों के साथ-साथ चंद्रमा (चंद्रयान -1, 2008; चंद्रयान -2, 2019) और मंगल (मार्स ऑर्बिटर मिशन, 2013) के मिशन को लॉन्च किया। इसरो ने 2021 में अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में स्थापित करने की योजना बनाई है।

भारत में सबसे प्रसिद्ध अंतरिक्ष अन्वेषण संगठनों में से एक है जो चंद्रयान और मंगलयान सहित अभूतपूर्व और अभिनव अंतरिक्ष से संबंधित परियोजनाओं के लिए जाना जाता है। यह गर्व की बात है और इसरो में वैज्ञानिक बनने की बात आती है तो देशभक्ति की भावना जागृत होती है।

आइए इसरो में वैज्ञानिक बनने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करें :- 

इसरो में वैज्ञानिक बनने के लिए विषय वरीयता इसरो में वैज्ञानिक बनने के लिए प्लस टू में गणित और भौतिकी को विषय संयोजन के रूप में चुनना अनिवार्य है। इन विषयों की मूल अवधारणाओं का गहन ज्ञान होना महत्वपूर्ण है। इसरो में वैज्ञानिक बनने का शैक्षणिक मार्ग IIST (भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान) में प्रवेश प्राप्त करना ISRO में वैज्ञानिक बनने का आसान और सीधा तरीका है।

             ISRO अक्सर IIT, NIT और अन्य प्रतिष्ठित सरकारी और निजी संस्थानों से स्नातक और स्नातकोत्तर इंजीनियरों का चयन करता है। उन पाठ्यक्रमों में डिग्री रखने की सलाह दी जाती है जिन्हें वैज्ञानिकों की स्थिति पर विचार करने के लिए शॉर्टलिस्ट किए जाने की अधिक संभावना है। इसरो में वैज्ञानिक के रूप में करियर बनाने के लिए एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, रेडियो इंजीनियरिंग और इंजीनियरिंग भौतिकी में बी.टेक उपयुक्त विकल्प हैं। कभी-कभी इसरो में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स, सिविल इंजीनियर्स और डेवलपर्स की आवश्यकता होगी 

                    इसरो में वैज्ञानिक बनने के लिए चयन प्रक्रिया बी.टेक पूरा करने के बाद आईसीआरबी (केंद्रीकृत भर्ती बैंगलोर) का प्रयास करना चाहिए । 

                    उम्मीदवारों के पास अध्ययन के संबंधित इंजीनियरिंग क्षेत्र में बी.टेक में 65% और उससे अधिक का अंक प्रतिशत होना चाहिए। अध्ययन किए गए इंजीनियरिंग के संबंधित क्षेत्रों में उम्मीदवारों के ज्ञान का परीक्षण किया जाता है। सफल उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए उपस्थित होने के लिए सूचित किया जाता है। उच्च अंकों के साथ क्लियरिंग इंटरव्यू इसरो में एक वैज्ञानिक के रूप में करियर के रास्ते खोलेगा।

इसरो में वैज्ञानिक बनने के वैकल्पिक तरीके भू-सूचना विज्ञान, रिमोट सेटिंग, इंस्ट्रुमेंटेशन, अनुप्रयुक्त गणित, भूभौतिकी, भूगोल या भौतिकी या गणित के क्षेत्र में किसी अन्य समकक्ष डिग्री जैसे बीटेक के बाद इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करना ऊपर बताए गए समान स्ट्रीम में एम. टेक पूरा करने के बाद, कोई व्यक्ति इसरो में वैज्ञानिक के पद के लिए सीधे आवेदन कर सकता है। 

            चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार शामिल हैं एक वैज्ञानिक के रूप में इसरो में लीन होने का एक अन्य विकल्प इसरो में जूनियर रिसर्च फेलो बनना है। यह अंततः उन्हें वैज्ञानिकों और इंजीनियरों पर शोध करने में सक्षम बनाएगा। इसरो में वैज्ञानिक बनने के लिए आवश्यक कौशल एक वैज्ञानिक की नौकरी के लिए गहन ज्ञान और कठिन से कठिन समस्याओं को हल करने में गहरी रुचि की आवश्यकता होती है। 

इसरो में वैज्ञानिक बनने के लिए आवश्यक मापदंडों में शामिल हैं गहरा ज्ञान इस धारा में गहरी दिलचस्पी निर्णय लेने और समस्या को सुलझाने के कौशल बातचीत का कौशल  सोच और तर्क शक्ति धैर्य और समय सीमा को पूरा करने की क्षमता रखना पड़ता है।

 हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि सभी लोग जो इस करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें ये गुण विरासत में मिले होंगे। इसरो में वैज्ञानिक बनने के लिए आवश्यक पर्याप्त कौशल को समझना और उसके अनुसार अपने कौशल को सुधारना महत्वपूर्ण है। इसरो में एक वैज्ञानिक के रूप में उम्मीदवार की स्थिति तय करने में अकादमिक उत्कृष्टता भी एक प्रमुख भूमिका निभाती है।

                  इसरो में वैज्ञानिक बनने का जोखिम कारक इसरो में एक वैज्ञानिक के रूप में नौकरी की बहुत मांग है। हमारे पास अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों की अधिकता नहीं है क्योंकि उनके द्वारा की जाने वाली गतिविधियों और परियोजनाओं की लागत बहुत अधिक है।

भारी धन की आवश्यकता हमारे देश में जड़ें जमाने के लिए अधिक संख्या में अंतरिक्ष अनुसंधान संगठनों के दायरे को भी कम करती है। हर देश में लगभग एक या दो ऐसे संगठन होते हैं इसरो जैसे संगठन अपने कर्मचारियों से सबसे सटीक काम की उम्मीद करते हैं क्योंकि थोड़ी सी भी त्रुटि पूरी परियोजना की विफलता का कारण बन सकती है जिसमें बहुत अधिक पैसा लगाया गया था।

 इसलिए यह समझना आवश्यक है कि एक वैज्ञानिक का काम निश्चित रूप से ‘केट-वॉक’ नहीं होगा। काम के घंटों के मामले में अनिश्चितता या एक निश्चित समय-सारणी की कमी भी इसरो वैज्ञानिक के रूप में करियर बनाने वाले उम्मीदवार के लिए जोखिम की कठिनाइयों में योगदान करती है।  

              इसरो वैज्ञानिक बनने की नवीनता इसरो वैज्ञानिक बनना और खुद को बनाए रखना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन ब्रह्मांड की विशाल संभावनाओं को एक बड़े परिप्रेक्ष्य से तलाशने और चुनौती देने की ललक इसे दुनिया की सबसे ग्लैमरस नौकरियों में से एक बनाती है। इसरो वैज्ञानिक के पद से बेहतर वेतन, प्रोत्साहन और नौकरी की सुरक्षा की पेशकश इसे महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए आकर्षक बनाती है।

Conclusion

तो दोस्तो कैसी लगी आपको हमारी आज की पोस्ट जिसमें हमने आपको बताया है कि ISRO Scientist Kaise Bane (इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने)। हमें उम्मीद है कि आपको हमारी पोस्ट पूरी तरह से समझ में आई होगी जिसमें आपको ISRO Me Scientist Kaise Bane से जुड़ी हर छोटी-बडी जानकारी मिली है।

अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई तो कमेंट बॉक्स करके जरूर बताएं। और उसके साथ ही इस पोस्ट को शेयर जरूर करें ताकि दूसरे लोगों को भी जानकारी मिलेगी की ISRO Scientist Kaise Bane (इसरो में वैज्ञानिक कैसे बने) | ISRO Main Scientist Kaise Bane.

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